Wednesday, 19 October 2016

मैं हूँ एक नन्ही चिड़िया !!

मैं हूँ एक नन्ही चिड़िया
मुझे आस है जीने की..
हर दर्द को पीने की  ...
कोई काट ना देना पंख मेरे  ..मुझे उड़ना है कुछ दूर...
ना रह पाऊँगी बंधन में  ..मत कर मुझको इतना मज़बूर .. !!
क्यों कैद करे मुझे पिंजरे में घुट घुट के सांसें लेती हूँ.
हर वक़्त बना रहता है डर..ना जीती हूँ ,ना मरती हूँ।।

देखे है मैंने भी कुछ सपने इन छोटी छोटी आँखों में..
हर हाल में है पूरा करना ये तलब है सीने की ..
मैं हूँ एक नन्ही चिड़िया मुझे आस है जीने की  . .. ।।
कर ले कर सकता है जितने भी सितम ..
हर मुश्किल से मैं लड़ जाउंगी...
एक दिन देखता रह जायेगा तू  और मैं तेरा पिंजरा लेकर उड़ जाउंगी..।।

दिखती हूँ छोटी नाज़ुक सी ...पर मुझमे  हिम्मत है हर एक ज़हर को पीने की ..
मैं हूँ एक नन्ही चिड़िया ,मुझे आस है जीने की ...!! 😊
                                                 
                                                द्वारा- प्रिया त्रिपाठी