ईश्वर द्वारा दिया गया बहुमूल्य उपहार है "ज़िन्दगी" ,पर इसे जीने वाले लोग अक्सर इसकी डोर अपने ही हाथो तोड़ दिया करते है। ...
हाल ही में ऐसा कुछ किया टी.व्ही. जगत की मशहूर अभिनेत्री pratyusha banerjee ने ।
"आनंदी" के नाम से चर्चित हुई इस युवा अभिनेत्री ने 17 साल की कम उम्र में हर घर में अपनी एक अलग पहचान बनायीं । परंतु महज 24 साल की उम्र में आत्महत्या करने जैसा घातक कदम उठा लेने की खबर प्रत्युषा से जुड़े हर एक व्यक्ति के लिए अप्रत्याशित सच था । कोई सोच सोच भी नहीं सकता था की इतनी जिंदादिल और चुलबुली लड़की ऐसा गंभीर कदम उठा लेगी।
अकसर इंसान हंसी का झूठ मुखौटा पहने ,अपने अंदर पलने वाले सभी चिंताओं एवं कष्टो को छुपता है । इस भीड़-भाड़ वाली high profile दुनिया में सब खुश हाल एवं समृद्ध जीवन चाहते है ,जिसे पाने के लिए एक व्यक्ति हर वह संभव कोशिश करता जिससे वह समाज में अपना एक high standard सेट कर सके । परंतु इस अधुनकिता और दिखावे की दौड़ में वह खुद को असलियत में खुद को खुश और आत्मसंतुष्ट रखना भूल जाता है
अपने जीवन में सिर्फ और सिर्फ जीत हासिल करने की होड़ ,व्यक्ति की मानसिक स्तिथि बिगाड़ कर उसे आत्महत्या करने में मजबूर कर सकती है ।
सफलता और असफलता तो जीवन में नाममात्र के दो पहलु है । अतः हमें असफलता को सकारात्मक दृष्टि के देखना चाहिए ।
अतः सफलता को हमेशा सीख का पर्याय मानो और साहस के साथ आगे बढ़ो ।
वर्षो पूर्व राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त जी ने भी अपनी इन पंक्तियों में मानव जीवन में छुपे अमृत्व को पिरोया है और हमें उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित किया है ।
"नर हो न निराश करो मन को
कुछ काम करो कुछ काम करो
जग में रहके निज नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो"
समझो जिसमे यह व्यर्थ न हो ।।
हाल ही में ऐसा कुछ किया टी.व्ही. जगत की मशहूर अभिनेत्री pratyusha banerjee ने ।
"आनंदी" के नाम से चर्चित हुई इस युवा अभिनेत्री ने 17 साल की कम उम्र में हर घर में अपनी एक अलग पहचान बनायीं । परंतु महज 24 साल की उम्र में आत्महत्या करने जैसा घातक कदम उठा लेने की खबर प्रत्युषा से जुड़े हर एक व्यक्ति के लिए अप्रत्याशित सच था । कोई सोच सोच भी नहीं सकता था की इतनी जिंदादिल और चुलबुली लड़की ऐसा गंभीर कदम उठा लेगी।
अकसर इंसान हंसी का झूठ मुखौटा पहने ,अपने अंदर पलने वाले सभी चिंताओं एवं कष्टो को छुपता है । इस भीड़-भाड़ वाली high profile दुनिया में सब खुश हाल एवं समृद्ध जीवन चाहते है ,जिसे पाने के लिए एक व्यक्ति हर वह संभव कोशिश करता जिससे वह समाज में अपना एक high standard सेट कर सके । परंतु इस अधुनकिता और दिखावे की दौड़ में वह खुद को असलियत में खुद को खुश और आत्मसंतुष्ट रखना भूल जाता है
अपने जीवन में सिर्फ और सिर्फ जीत हासिल करने की होड़ ,व्यक्ति की मानसिक स्तिथि बिगाड़ कर उसे आत्महत्या करने में मजबूर कर सकती है ।
सफलता और असफलता तो जीवन में नाममात्र के दो पहलु है । अतः हमें असफलता को सकारात्मक दृष्टि के देखना चाहिए ।
अतः सफलता को हमेशा सीख का पर्याय मानो और साहस के साथ आगे बढ़ो ।
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कुछ काम करो कुछ काम करो
जग में रहके निज नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो"
समझो जिसमे यह व्यर्थ न हो ।।
wonderful thoughts......
ReplyDeleteDat was a nyc thought.. sucide z nt d solution of any prblm at all... bura samay sabke sath ata hai but uss samay me bhi hume yad rakhne chahiye ki ye samay bhi beet jayega...
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteजिंदगी से हार मान के ये रास्ता अपनाना कायरता है । बेहतरीन शब्दों का गठजोड़ । ह्रदय को छु जाने वाले विचार।
ReplyDeleteWell said..
ReplyDeleteThis is very interesting to see very straight forward article on your blog like this star wars series part-vii, passengers and stephen hawking grand design with full hd video available on my blog too on Science Care For You – International Aerospace Science and Technology
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